February 22, 2025
आधुनिक शिक्षा और कंपीटीशन के नाम पर मासूम बच्चों की हेल्थ के साथ खिलवाड़ मत करें, मोबाइल प्रयोग न कर बड़ी स्क्रीन का प्रयोग करें: स्वामी दिव्यानंद जी
फतेहाबाद (उमंग सरदाना)। काला मोतिया हो या डायबिटिक रैटीनोपैथी और निकट दृष्टि रोग हो ये तीनों आज दृष्टिहीनता के मुख्य कारण बनते जा रहे हैं। चुप चाप नजरों को चुराने वाले अपने आने की आहट तक भी नहीं द ेते। आज भारत में सवा करोड़ से अधिक लोग हैं, जो कालामोतिया की पकड़ में हैं। इससे अधिक भी हो सकते हैं। मंथन आई हैल्थ केयर फाऊंडेशन के सौजन्य से श्री गीता भवन मॉडल टाऊन फतेहाबाद में पूज्य गुरूदेव डॉ.स्वामी दिव्यानंद जी महाराज की छत्रछाया में आयोजित निशुल्क आंखों के जागरूकता शिविर में प्रसिद्ध नेत्र विशेषज्ञ डॉ.विनोद शर्मा ने कहा कि संख्या सवा करोड़ से भी अधिक हो सकती है। 80 प्रतिशत लोगों को तो पता ही नहीं लग पाता कि उन्हें यह रोग है। जबकि इससे जितनी दृष्टि चली जाती है, वापस नहीं आती। बस, समय पर यह रोग पकड़ में आ जाए तो इलाज संभव है। यदि परिवार में किसी सदस्य को है, लाइट के चारों ओर रंगीन गोल चक्कर दिखते हैं, तेज सिर दर्द या आंखों में दर्द होता है तो अवश्य चेक करवाएं। शुगर वाले रोगी सावधान रहें, इसका पहला प्रभाव आंखों पर ही पड़ता है। खाली ब्लड शुगर ही नहीं नेत्र और गुर्दों की भी जांच करवाएं। निकटदृष्टि रोग जिसे मायोपिया कहते हैं, सबसे ज्यादा प्रभाव इसका बच्चोंं पर पड़ रहा है। धूल भरे वातावरण से बचाते हुए बच्चों को 2-3 घंटें की धूप देवें। मोबाइाल वाला काम, टीवी स्क्रीन पर थोड़े-थोड़े समय का गैप बनाकर करने की आदत बनाएं। विटामीन डी की कमी का प्रभाव दृष्टि को नुकसान कर सकता है। कार्यक्रम के अंत में श्री गीता विहारी सेवा समिति के प्रधान राजीव बतरा द्वारा डॉ. विनोद शर्मा को शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया गया और महाराज श्री ने प्रसाद देकर आशीर्वाद दिया।