January 23, 2026
Haryana HC Big Decision: रिटायर्ड जजों की पेंशन पर सरकार को झटका! वेतन से नहीं काट सकेंगे पैसा, 4 हफ्ते में चुकाना होगा एरियर
चंडीगढ़ (Media Jagat Legal Desk): पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana High Court) ने हरियाणा सरकार को बड़ा झटका देते हुए सेवानिवृत्त जजों के हक में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि एक 'संवैधानिक अधिकार' है, जिसे सरकार अपनी मर्जी से काट या एडजस्ट नहीं कर सकती।
क्या था पूरा मामला? दरअसल, हरियाणा सरकार ने लोकायुक्त (Lokayukta) के पद पर नियुक्त हुए पूर्व जजों की सैलरी से उनकी पेंशन की राशि काट ली थी। सरकार के इस फैसले (18 अगस्त 2022 के आदेश) को पूर्व जस्टिस एन.के. सूद और अन्य जजों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि लोकायुक्त का वेतन वर्तमान हाईकोर्ट जज के बराबर होता है और इसमें कटौती का कोई नियम नहीं है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: 'यह असंवैधानिक है' मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संदीप मौदगिल ने सरकार की कार्रवाई को 'भेदभावपूर्ण' और 'विधि विरुद्ध' करार दिया। उन्होंने कहा:
"पेंशन एक सांविधानिक रूप से संरक्षित अधिकार है। जहां संविधान और संसदीय कानून प्रभावी हैं, वहां राज्य सरकार (कार्यपालिका) अपनी मनमानी व्याख्या नहीं थोप सकती।"
कोर्ट ने कहा कि हरियाणा लोकायुक्त अधिनियम, 2002 के तहत लोकायुक्त का वेतन हाईकोर्ट के मौजूदा जज के बराबर तय किया गया है। कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो सरकार को पेंशन काटने की शक्ति देता हो।
4 हफ्ते का अल्टीमेटम: ब्याज सहित लौटाना होगा पैसा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है और निर्देश दिया है कि:
काटी गई पूरी राशि 4 सप्ताह (एक महीने) के भीतर वापस की जाए।
बकाया राशि पर 6 प्रतिशत की दर से ब्याज भी देना होगा।
यह फैसला न केवल याचिकाकर्ताओं के लिए राहत है, बल्कि यह प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ एक नजीर (Precedent) भी बन गया है।
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