April 29, 2026
Bhuna News: रिहायशी इलाके में अवैध पोल्ट्री फार्म के निर्माण पर भड़के लोग, प्रशासन को दी धरने और कोर्ट जाने की चेतावनी
भूना/फतेहाबाद (Media Jagat Desk): भूना के उकलाना रोड स्थित सरकारी बागवानी केंद्र के समीप रिहायशी क्षेत्र में अवैध रूप से बनाए जा रहे पोल्ट्री फार्म को लेकर स्थानीय निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है। नियमों को ताक पर रखकर हो रहे इस निर्माण कार्य से लोगों में भारी रोष है। इस गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट को देखते हुए समस्त क्षेत्रवासियों ने लामबंद होकर उपायुक्त (DC), एसडीएम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पशुपालन एवं डेयरी विभाग को लिखित शिकायत सौंपी है और दोषियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की मांग की है।
CPCB के नियमों की उड़ रही सरेआम धज्जियां
उपायुक्त को ई-मेल के जरिए भेजी गई शिकायत में स्थानीय निवासियों (राजपाल, अमर सिंह, मक्खन सिंह, भोलू राम, सतीश कुमार, सुनील कुमार, करण सिंह, फूल कुमार, गुलशन कुमार, मुनीश कुमार, सीता रानी, भवानी देवी, सोमवती देवी, सुनीता रानी आदि) ने बताया कि उनके घरों के बिल्कुल सटकर (शून्य दूरी पर) एक नया पोल्ट्री फार्म बनाया जा रहा है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के सख्त दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी नए पोल्ट्री फार्म की रिहायशी आबादी से दूरी कम से कम 500 मीटर होनी अनिवार्य है। लेकिन यहां इन नियमों की सरेआम अवहेलना की जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि बिना 'कंसेंट टू एस्टेब्लिश' के हो रहा यह निर्माण वायु प्रदूषण अधिनियम 1981 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 270/273 के तहत एक गंभीर अपराध है।
बीमारियों और बर्ड-फ्लू का सता रहा डर
ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी गहरी चिंता जाहिर करते हुए बताया कि इस क्षेत्र में पहले से ही एक पोल्ट्री फार्म चल रहा है, जिसने उनका जीना मुहाल कर रखा है। अगर यह दूसरा फार्म भी चालू हो गया, तो अमोनिया गैस और भयंकर दुर्गंध के कारण लोगों का अपने घरों में सांस लेना भी दूभर हो जाएगा। यह पूरा इलाका मक्खी-मच्छरों और बर्ड-फ्लू जैसे जानलेवा वायरस का केंद्र बन जाएगा, जिसका सबसे ज्यादा खतरा बच्चों और बुजुर्गों को है। इसके अलावा भूजल के भी प्रदूषित होने की पूरी आशंका है।
मौलिक अधिकार का हनन, अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
निवासियों ने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत 'स्वच्छ पर्यावरण और स्वास्थ्य' हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। यदि प्रशासन ने जनहित को ध्यान में रखते हुए तुरंत इस अवैध निर्माण को नहीं रुकवाया और इसे ध्वस्त नहीं किया, तो ग्रामीण अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होंगे।
इसके साथ ही ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वे जिला स्तर पर अनिश्चितकालीन धरना भी शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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