January 23, 2026 Haryana Exam News: अब परीक्षा में नहीं उतारना पड़ेगा मंगलसूत्र! महिलाओं और सिख छात्रों को मिली बड़ी राहत, जानिए नई गाइडलाइन

चंडीगढ़ (Media Jagat Bureau): हरियाणा में सरकारी नौकरी या बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। अक्सर एग्जाम सेंटर के बाहर महिलाओं को अपनी ज्वैलरी और सुहाग की निशानी 'मंगलसूत्र' उतारते हुए देखा जाता था, जिससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत होती थीं। लेकिन अब खट्टर सरकार ने इस नियम को बदल दिया है।

हरियाणा सरकार ने फैसला लिया है कि अब राज्य में होने वाली किसी भी परीक्षा (Exam) में विवाहित महिलाएं मंगलसूत्र (Mangalsutra) पहनकर बैठ सकेंगी। साथ ही, सिख छात्रों को भी धार्मिक प्रतीक कृपाण (Kirpan) ले जाने की अनुमति दी गई है।

📋 किन परीक्षाओं में लागू होगा ये नियम? सरकार द्वारा जारी नए आदेशों के मुताबिक, यह छूट HTET, CET, CTET, कॉलेज सेमेस्टर एग्जाम और स्कूल शिक्षा बोर्ड की सभी परीक्षाओं में लागू होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी अभ्यर्थी को अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ समझौता न करना पड़े।

⚠️ लेकिन माननी होंगी ये शर्तें (Exam Guidelines) राहत के साथ-साथ सरकार ने सुरक्षा के लिहाज से कुछ सख्त नियम भी बनाए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा:

1. महिलाओं के लिए नियम (For Married Women):

  • जो महिलाएं मंगलसूत्र पहनकर एग्जाम देना चाहती हैं, उन्हें परीक्षा शुरू होने से कम से कम 30 मिनट पहले सेंटर पर पहुंचना होगा।

  • यह समय इसलिए रखा गया है ताकि सुरक्षा कर्मी मंगलसूत्र की ठीक से जांच (Security Check) कर सकें और परीक्षा के दौरान कोई बाधा न आए।

2. सिख छात्रों के लिए नियम (For Sikh Students):

  • सिख परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र पर 1 घंटा पहले पहुंचना होगा।

  • कृपाण का साइज: कृपाण की कुल लंबाई 9 इंच (22.86 सेमी) से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

  • ब्लेड का साइज: कृपाण के ब्लेड की लंबाई 6 इंच (15.24 सेमी) से अधिक नहीं होनी चाहिए।

⚖️ कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला सरकार ने अपने पत्र में दिल्ली हाईकोर्ट और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों (जैसे डब्लूपी (सी) 7550/2017) का हवाला दिया है। सरकार का कहना है कि परीक्षाओं की पवित्रता और सुरक्षा जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी नागरिकों के धार्मिक अधिकारों और संस्कृति का संरक्षण करना भी है।

निष्कर्ष: यह फैसला निश्चित रूप से उन हजारों महिलाओं के लिए मानसिक शांति लेकर आएगा, जिन्हें परीक्षा हॉल में जाने से पहले अपने सुहाग की निशानी उतारनी पड़ती थी।

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