February 21, 2026 Haryana News: 310 साल पुराना है 'राजनीतिक नर्सरी' गांव चौटाला का इतिहास! जानें सहारन गोत्र ने कैसे बसाया यह ऐतिहासिक गांव

सिरसा/डबवाली (Media Jagat Desk): हरियाणा की राजनीति का जिक्र हो और गांव चौटाला (Chautala Village) का नाम न आए, ऐसा असंभव है। देश की राजनीति में एक अलग पहचान रखने वाला यह गांव करीब 310 साल पुराना एक समृद्ध इतिहास समेटे हुए है। कभी बंजर भूमि से शुरुआत करने वाला यह इलाका आज भले ही एक विकसित पंचायत का रूप ले चुका है, लेकिन इसके बसने की कहानी बेहद दिलचस्प और संघर्षों से भरी है। आइए, Media Jagat की इस खास रिपोर्ट (Panchayat Nama) में जानते हैं इस गांव की पूरी कहानी। 🚩

📜 ऐसे बसा था गांव चौटाला: सहारन गोत्र का अहम योगदान इतिहासकारों और गांव के बुजुर्गों के अनुसार, चौटाला गांव का बसेरा विक्रम संवत 1884 में हुआ था। राजस्थान के गांव उड़सर के निवासी श्रीराम सहारन ने तत्कालीन पंजाब की रानी आसकौर से यहां की जमीन खरीदी थी। उस दौर में यहां लूटपाट करने वाले गिरोहों का भारी खौफ रहता था।

लुटेरों के आतंक से तंग आकर श्रीराम सहारन ने राजस्थान से अपने रिश्तेदारों—गोदारा और सिहाग गोत्र के लोगों को यहां लाकर बसाया। उनकी इस एकजुटता के बाद लुटेरों का आना हमेशा के लिए बंद हो गया। धीरे-धीरे 52 हजार बीघा की इस विशाल जमीन को चौटाला, भारूखेड़ा, आशाखेड़ा और तेजाखेड़ा जैसे गांवों में बांट दिया गया।

🏛️ देश की 'राजनीतिक नर्सरी' है चौटाला गांव चौटाला को यूं ही राजनीतिक नर्सरी नहीं कहा जाता। इस एक गांव ने देश और प्रदेश को कई बड़े राजनेता दिए हैं। इस गांव की माटी ने अब तक:

  • 1 उप-प्रधानमंत्री (Deputy PM)

  • 2 मुख्यमंत्री (Chief Minister)

  • 1 उपमुख्यमंत्री (Deputy CM)

  • 2 सांसद (MP)

  • 16 विधायक (MLA) दिए हैं। यही नहीं, इस गांव से 2 अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों का जन्म भी हुआ है।

🏥 सुविधाएं बहुत, लेकिन उच्च शिक्षा का अभाव वर्तमान में गांव में बस स्टैंड, नागरिक अस्पताल, पशु चिकित्सालय, डाकघर, इनडोर व आउटडोर स्टेडियम, एसबीआई और कृषि सहकारी बैंक जैसी तमाम बड़ी सुविधाएं मौजूद हैं। यहां 10 स्कूल और एक आईटीआई (ITI) कॉलेज भी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी राजनीतिक पैठ होने के बावजूद, यहां उच्च शिक्षा (Degree College) के लिए कोई बड़ा संस्थान नहीं है।

📊 पंचायत का लेखा-जोखा (एक नज़र में)

  • कुल जनसंख्या: लगभग 16,500

  • कुल वोटर: 12,183

  • जिला मुख्यालय (सिरसा) से दूरी: 90 किलोमीटर

  • मौजूदा सरपंच: सुभाष बिश्नोई

  • मुख्य व्यवसाय व उत्पादन: कृषि (गेहूं और धान) एवं पशुपालन।

  • भाईचारा: गांव में आज 36 बिरादरी के लोग बड़े प्रेम और सौहार्द के साथ रहते हैं।

🙏 ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल आस्था के मामले में भी यह गांव बहुत आगे है। यहां 1960 में स्थापित प्राचीन शिव मंदिर, दो हनुमान मंदिर, दुर्गा मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर, बाबा रामदेव मंदिर और दादा हरिराम मंदिर जैसे कई आस्था के केंद्र हैं। इसके अलावा यहां गुरुद्वारा साहिब और एक पुरानी मस्जिद भी स्थित है। गांव में दो प्रसिद्ध डेरे (बाबा भोलागिरी महाराज और बाबा कालूनाथ) भी मौजूद हैं।


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