December 25, 2025
हरियाणा सरकार को झटका: बिजली निगम में 201 असिस्टेंट इंजीनियरों की भर्ती रद्द, हाईकोर्ट का आदेश- अब सिर्फ 'GATE' मेरिट से होगा चयन
चंडीगढ़/हरियाणा | Media Jagat News Desk
Haryana High Court Judgement: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता को लेकर एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने हरियाणा पावर यूटिलिटीज (Haryana Power Utilities) में वर्ष 2020 में की गई 201 सहायक अभियंताओं (Assistant Engineers - AE) की पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि संविधान के समानता के अधिकार के तहत भर्ती प्रक्रिया में मनमाने ढंग से अतिरिक्त अंक नहीं दिए जा सकते। अब यह पूरी भर्ती नए सिरे से केवल गेट (GATE) परीक्षा की मेरिट के आधार पर की जाएगी।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार की बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने पाया कि भर्ती प्रक्रिया में 'सोशियो-इकोनॉमिक क्राइटेरिया' (सामाजिक-आर्थिक आधार) के नाम पर 20 अतिरिक्त अंक दिए गए थे।
कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार दिया।
अदालत का मानना है कि इससे उन योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ, जिनके GATE परीक्षा में अंक ज्यादा थे, लेकिन उन्हें अतिरिक्त 20 अंक नहीं मिले।
वहीं, कम मेरिट वाले उम्मीदवार अतिरिक्त अंकों के सहारे चयन सूची में ऊपर आ गए।
क्या था पूरा मामला?
यह भर्ती 4 दिसंबर 2020 को विज्ञापित की गई थी। हरियाणा पावर यूटिलिटी ने HVPN, HPGCL, UHBVN और DHBVN निगमों के लिए यह वैकेंसी निकाली थी।
कुल पद: 201 (इलेक्ट्रिकल कैडर: 168, मैकेनिकल: 15, सिविल: 18)।
चयन का आधार GATE परीक्षा था, लेकिन साथ में सामाजिक-आर्थिक आधार के 20 अंक जोड़ दिए गए थे।
याचिकाकर्ता की दलील से पलटा फैसला
सिरसा निवासी सुनील गोदारा ने 2021 में इस भर्ती को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता के वकील संचित पूनिया ने कोर्ट में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के GATE में 84.28 अंक थे, जो कि चयनित उम्मीदवार के बराबर या उससे ज्यादा थे। लेकिन, उसे सोशियो-इकोनॉमिक के अंक नहीं मिले, जिससे वह बाहर हो गया और कम नंबर वाले उम्मीदवार नौकरी पा गए।
हाईकोर्ट ने बिजली निगम को सख्त निर्देश दिए हैं कि सोशियो-इकोनॉमिक अंकों को हटाकर, पूरी पारदर्शिता के साथ सिर्फ GATE स्कोर के आधार पर नई मेरिट लिस्ट तैयार की जाए और भर्ती प्रक्रिया को दोबारा पूरा किया जाए। इस फैसले से उन युवाओं में खुशी की लहर है जो मेरिट में ऊपर होने के बावजूद सिस्टम की खामियों का शिकार हो गए थे।