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January 03, 2026 Haryana Farmers Unique ID: अब किसानों का बनेगा 'आधार' जैसा खास पहचान पत्र

चंडीगढ़/हरियाणा | Media Jagat News Desk ✍️

हरियाणा के अन्नदाताओं (किसानों) के लिए एक बहुत बड़ी और जरूरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार के 'डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन' (Digital Agriculture Mission) को आगे बढ़ाते हुए हरियाणा सरकार ने अब प्रदेश के हर किसान की एक 'यूनिक आईडी' (Unique ID) बनाने का फैसला किया है।

आसान भाषा में समझें तो, जैसे देश के हर नागरिक के लिए आधार कार्ड जरूरी है, वैसे ही अब खेती-किसानी से जुड़ी सरकारी योजनाओं का फायदा लेने के लिए किसानों के पास यह 'विशिष्ट पहचान पत्र' (Farmers Unique ID) होना अनिवार्य होगा।

🚜 क्यों बनाई जा रही है यह यूनिक आईडी?

सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को मिलने वाली मदद में बिचौलियों का खेल खत्म हो और पैसा सीधा उनके खाते में पहुंचे। इस आईडी के जरिए 'एग्री स्टैक पोर्टल' (Agri Stack Portal) पर किसानों का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। जिन किसानों के नाम पर खेती की जमीन है, सिर्फ उन्हीं की यह आईडी बनेगी।

📜 इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए आईडी जरूरी

अगर कोई किसान अपनी यूनिक आईडी नहीं बनवाता है, तो भविष्य में उसे कई महत्वपूर्ण योजनाओं से वंचित रहना पड़ सकता है। इस आईडी के बनने के बाद ही आपको नीचे दी गई योजनाओं का लाभ मिलेगा:

  • ✅ पीएम किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Nidhi)

  • ✅ मेरी फसल मेरा ब्योरा (Meri Fasal Mera Byora)

  • ✅ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Crop Insurance)

  • ✅ कृषि यंत्रों पर सब्सिडी (Agricultural Subsidy)

  • ✅ फसल अवशेष प्रबंधन और मुआवजे की राशि

🏢 कहां और कैसे बनेगा यह कार्ड?

शुरुआत में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सोनीपत और कुछ अन्य जिलों के चुनिंदा गांवों में शुरू किया गया था। लेकिन इसकी सफलता को देखते हुए अब इसे पूरे हरियाणा में लागू कर दिया गया है। किसान भाई अपनी यूनिक आईडी बनवाने के लिए इन जगहों पर संपर्क कर सकते हैं:

  1. अटल सेवा केंद्र (Atal Seva Kendra)

  2. कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)

  3. कृषि विभाग के कार्यालय

  4. हल्के के पटवारी भी इस डेटा को वेरिफाई करने में मदद कर रहे हैं।

📲 डिजिटल मैपिंग से जमीन का 'सच' आएगा सामने

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि गांवों की डिजिटल मैपिंग (Digital Mapping) होगी। इससे जमीन की सही स्थिति, मालिकाना हक और खेत में कौन सी फसल बोई गई है, इसका 'रियल टाइम रिकॉर्ड' सरकार के पास मौजूद रहेगा। इससे फर्जीवाड़ा रुकेगा और असली हकदार को ही मुआवजा मिलेगा।

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